उत्तराखंड

भाजपा की नई केंद्रीय टीम: दुष्यंत गौतम की छुट्टी, उत्तराखंड को मिलेगा नया प्रभारी

Kavita2
18 Aug 2026 9:56 AM IST
भाजपा की नई केंद्रीय टीम: दुष्यंत गौतम की छुट्टी, उत्तराखंड को मिलेगा नया प्रभारी
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देहरादून/नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नई केंद्रीय टीम के गठन के साथ ही उत्तराखंड की राजनीति में बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत साफ हो गए हैं। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा घोषित की गई पदाधिकारियों की नई सूची में राष्ट्रीय महामंत्री पद से दुष्यंत गौतम को हटा दिया गया है। दुष्यंत गौतम लंबे समय से उत्तराखंड के प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव नए प्रदेश प्रभारी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में लड़ेगी।

गौतम के साथ-साथ उत्तराखंड से आने वाले वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद नरेश बंसल को भी नई राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं दी गई है। केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही उत्तराखंड के लिए नए प्रदेश प्रभारी के नाम का आधिकारिक ऐलान कर सकता है।अंकिता भंडारी प्रकरण और दूरी से असहज थी पार्टीदुष्यंत गौतम को पद से हटाए जाने के फैसले के पीछे उत्तराखंड का चर्चित और संवेदनशील 'अंकिता भंडारी प्रकरण' मुख्य वजह माना जा रहा है।

बीते दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में वायरल हुए दावों में कथित तौर पर दुष्यंत गौतम का नाम इस प्रकरण से जोड़ा गया था। हालांकि, भाजपा और गौतम ने इन आरोपों को निराधार, भ्रामक और राजनीतिक साजिश करार दिया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी उनके पक्ष में अंतरिम राहत देते हुए इस संबंध में आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट हटाने के निर्देश दिए थे।

बावजूद इसके, इस प्रकरण में नाम घसीटे जाने के बाद से दुष्यंत गौतम ने खुद को उत्तराखंड भाजपा की सांगठनिक गतिविधियों और दौरों से काफी हद तक दूर कर लिया था। आगामी विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े उत्तराखंड में विपक्षी दल कांग्रेस और अन्य संगठन अंकिता भंडारी मामले को लेकर राज्य सरकार पर लगातार हमलावर थे। ऐसे में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लगातार असहज स्थिति का सामना कर रहा था। संगठन के कार्यक्रमों से प्रभारी की दूरी और विवादों की छाया के कारण पार्टी आलाकमान ने नए चेहरे को कमान सौंपने का मन बना लिया था।

नरेश बंसल को भी नई टीम में नहीं मिली जगह

पार्टी के संगठनात्मक पुनर्गठन में दुष्यंत गौतम ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल को भी झटका लगा है। बंसल, जो पूर्व में राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष और राज्य संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं, को नई केंद्रीय टीम में कोई पद नहीं दिया गया है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व अब उत्तराखंड के राजनीतिक और जातीय समीकरणों को साधते हुए संगठन में नए और ऊर्जावान चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

नए प्रदेश प्रभारी के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए साख का सवाल हैं। ऐसे में भाजपा आलाकमान किसी ऐसे वरिष्ठ नेता को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपना चाहता है जो:

विवादों से दूर हो: पार्टी की छवि को बेदाग रखकर जनता के बीच आक्रामक ढंग से केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों को रख सके।गुटबाजी पर लगाम लगाए: प्रदेश संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सके।चुनाव प्रबंधन में माहिर हो: जमीनी स्तर पर कैडर को फिर से पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में सक्रिय कर सके।

विपक्ष के हमलों को बेअसर करने की कवायद

उत्तराखंड में विपक्षी पार्टियां अंकिता भंडारी मामले में 'वीआईपी' (VIP) के नाम को लेकर लगातार सड़कों से लेकर विधानसभा तक हंगामा करती रही हैं। दुष्यंत गौतम की विदाई के पीछे इस राजनीतिक दबाव को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। भाजपा नेतृत्व का यह फैसला दर्शाता है कि पार्टी चुनाव से पहले किसी भी तरह का नकारात्मक माहौल अपने खिलाफ नहीं बनने देना चाहती।अब उत्तराखंड भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं की निगाहें दिल्ली की ओर टिकी हैं कि केंद्रीय नेतृत्व किसे उत्तराखंड के नए 'कप्तान' के रूप में प्रभारी की कुर्सी पर बिठाता है।

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